Satyam Bruyat - Career Solution: दादाभाई नौरोजी की जीवनी और उनके संघर्ष Biography and struggle of dadabhai nauroji

दादाभाई नौरोजी की जीवनी और उनके संघर्ष Biography and struggle of dadabhai nauroji

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने वालों में से एक थे दादाभाई नौरोजी, दादाभाई नौरोजी भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता अभियान के महान राजनीतिक नेता के रूप में जाने जाते थे.
दादाभाई नौरोजी का पूरा नाम दादाभाई पालन जी नौरोजी था उनका जन्म 4 सितंबर 1825 को महाराष्ट्र में हुआ था.
दादाभाई नौरोजी के पिता का नाम पालनजी नौरोजी और उनके माता का नाम माणिक बाई था.
दादा भाई नौरोजी ने एलफिंस्टन कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की उनकी कुशलता की वजह से बड़ौदा के महाराज सयाजीराव गायकवाड तृतीय ने अपने साम्राज्य क्या दीवान नियुक्त कर दिया.



सन् 1855 में दादाभाई नौरोजी ने एलफिंस्टन कॉलेज में गणित के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया उस दौर में दादाभाई नौरोजी ऐसे शैक्षणिक दर्जा पाने वाले पहले व्यक्ति थे.
सन 1855 की बातें दादाभाई नौरोजी कामा एंड कंपनी में पार्टनर बनने के लिए लंदन गए और ब्रिटेन में यह पहली भारतीय कंपनी स्थापित हुई लेकिन 3 साल बाद ही दादा भाई नौरोजी ने इस्तीफा दे दिया.

सन 1859 में दादाभाई नौरोजी ने खुद की कॉटन ट्रेडिंग कंपनी खोली जो बाद में दादाभाई नौरोजी एंड कंपनी के नाम से प्रसिद्ध हो गई.
ब्रिटिश हुकूमत को भारतीयों की ताकत दिखाने के लिए उनके सामने भारतीयों की ताकत को रखने के लिए 1867 में दादाभाई नौरोजी ने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना में अपना सहयोग दिया इस संस्था का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी हुकूमत को भारतीयों की ताकत का एहसास कराना था.


सन 1886 में दादाभाई नौरोजी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया उसके बाद दादा भाई नौरोजी ने 1968 में अपनी किताब पावर्टी एंड अन ब्रिटिश रूल इन इंडिया को प्रकाशित किया.

दादाभाई नौरोजी 01892 से 1895 तक यूनाइटेड किंगडम कि संसद में MP बनने वाले पहले एशियाई नेता थे.

दादाभाई नौरोजी तीन बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए तथा तीसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपनी पार्टी में हो रहे विभाजन को रोका.
30 जून 1917 को 92 वर्ष की आयु में दादा भाई नौरोजी का देहांत हो गया.

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