1857 की क्रांति के महानायक मंगल पांडे की जीवनी और उनके संघर्ष The biography of Managal Pandey

The biography of Managal Pandey

क्रांतिकारी मंगल पांडे सन 1857 की क्रांति का जिक्र जब भी सामने आता है तो क्रांतिकारी मंगल पांडे का नाम सबसे ऊपर आता है 1857 के विद्रोह के पीछे का शाही सेना में एक मात्र सैनिक था, जिसे हम मंगल पांडे के नाम से जानते हैं। भारत के इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में अभी भी एक ऐतिहासिक स्मृति चिन्ह हैं।
 वास्तव में इस पुरुष ने प्रथम बार में ही भारत में सही अर्थों में क्रांति का श्रीगणेश कर दिया था भारत मां के वीर सेनानी मंगल पांडे का जन्म बलिया के ब्राह्मण परिवार में 19 जुलाई 1827 को हुआ था वह वीर थे इसलिए सेना में भर्ती हुए उनकी उम्र 30 साल की हुई थी उन्होंने भारत माता के चरणों में 8 अप्रैल 1857 को अपना बलिदान देकर देश में क्रांति की मशाल जला दी.
मंगल पांडे बैरकपुर छावनी में 34 वी एन आई बटालियन में तैनात थे उन्हें खबर मिली कि जो हथियार सैनिकों को दिए जाते हैं तुमने गाय और सूअर की चर्बी का उपयोग होता है धार्मिक भावनाओं भावनाओं से आहत होकर मंगल पांडे ने कारतूस लेने से मना कर दिया.




परेड के बाद सैनिकों से सीधे सवाल किया तुम में से कौन कारतूस लेने से इंकार करता है इससे पहले कि नहीं कोई सैनिक बोलता मंगल पांडे निर्भयता से आगे बढ़कर बोले मैं.
यह 19 मार्च 1857 की घटना है अंग्रेज लेफ्टिनेंट बहुत गुस्से में था मगर अपने क्रोध पर काबू करते हुए उसने पूछा इंकार की वजह मंगल पांडे ने एक ही स्वर में जवाब दिया कि हमें जो कारतूस इस्तेमाल करने के लिए दिया जाता है उसमें गाय और सूअर की चर्बी मिली हुई है.

ऐसी कारतूसों के कारण हम हिंदुस्तानियों हिंदू और मुसलमानों दोनों की धार्मिक भावनाएं आहत होती है.

भारतीय सैनिकों में अंग्रेजी हुकूमत से पहले से ही असंतोष था लेकिन इसका अर्थ उसने आग में घी का कार्य किया जब 9 फरवरी 1857 को कारतूस सेना को बांटा गया तब मंगल पांडे ने उसे लेने से इंकार कर दिया.
इसके बाद मंगल पांडे का हथियार और वर्दी उतार लेने का हुक्म जारी कर दिया गया लेकिन मंगल पांडे इस आदेश को मानने से मना कर दिया.
29 मार्च 18 सो 57 को मंगल पांडे की राइफल चुनने के लिए जब अंग्रेज अफसर मेजर आगे बढ़ा तो मंगल पांडे ने उस पर हमला कर दिया और इस तरह से यह कारतूस अंग्रेजी हुकूमत के लिए घातक सिद्ध हुआ और 29 मार्च 1857 को अंग्रेजो के खिलाफ मंगल पांडे ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया.

आक्रमण करने से पहले मंगल पांडे ने अपने साथियों से समर्थन मांगा लेकिन डर के कारण किसी ने भी उनका समर्थन दे दिया तब उन्होंने अपने राइफल से मेजर को मौत के घाट उतार दिया.
इसके बाद मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेंट बाप को मौत के घाट उतार दिया जिसके बाद अंग्रेजी सिपाहियों ने मंगल पांडे को पकड़ लिया.
मंगल पांडे पर कोर्ट मार्शल का मुकदमा चला कर 6 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई.
मंगल पांडे को फांसी देने की तिथि 18 अप्रैल 1857 निश्चित की गई थी लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने मंगल पांडे को निर्धारित तिथि से 10 दिन पहले 8 अप्रैल 1857 को ही फांसी पर लटका दिया.

मंगल पांडे के बारे में 10 रोचक तथ्य Interesting Facts About Mangal Pandey


  • यह मंगल पांडे थे जिन्होंने 1857 में आजादी के पहले भारतीय युद्ध को उकसाया था।
  • बैरकपुर में बंगाल इन्फेंट्री में अपनी सेवा के दौरान, अंग्रेजों ने एक नए प्रकार का कारतूस पेश किया, जो गाय और सुअर की चर्बी से बना था। मुस्लिम और हिंदू दोनों धार्मिक कारणों से कारतूस का उपयोग करने में असमर्थ थे। यह मंगल पांडे थे जो कारतूस के उपयोग को रोकने के लिए भारतीय सैनिकों के समूह का नेतृत्व कर रहे थे।
  • यह माना जाता था कि मंगल पांडे अंग्रेजों की इस नई चाल पर इतने उग्र हो गए थे कि वह अपने पहले अंग्रेज को देखकर मारने के लिए उकसाया।
  • उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा रखी और लेफ्टिनेंट बेट पर गोलीबारी की, हालांकि वह शॉट से चूक गए। लेकिन उन्होंने लेफ्टिनेंट को इतने रोष के साथ काबू किया कि वह साइट से अपने जीवन के लिए दौड़ पड़े।


  • मंगल पांडे का प्रयास व्यर्थ नहीं गया। इसने बैरकपुर से मेरठ, दिल्ली, कोवनपोर और लखनऊ तक सिपाही विद्रोह शुरू किया।
  • उनके वास्तविक प्रयासों ने अंग्रेजों को आदेश दिया कि वे कारतूसों पर अपनी खुद की ग्रीसिंग का इस्तेमाल करें।
  • विद्रोही के इस कार्य के लिए, मंगल पांडे को जेल में डाल दिया गया और मौत की सजा सुनाई गई।
  • सैन्य अदालत के मुकदमे में, उसे अपराध में अपने सहयोगियों का नाम देने के लिए कहा गया था। लेकिन एक सच्चे नायक की तरह, उन्होंने माँ को रखा, जिसने उन्हें अपने जीवन का खर्च दिया।
  • उन्हें 18 अप्रैल, 1857 को फांसी दी जाने वाली थी। लेकिन 8 मई 1857 को बिना किसी पूर्व सूचना के उनकी मृत्यु 10 दिनों के लिए टाल दी गई थी।
  • जिस स्थान पर मंगल पांडे ने ब्रिटिश अधिकारियों पर गोली चलाई थी बाद में उन्हें वहां फांसी दी गई थी 


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