सी राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास  के थोरापल्ली नामक गांव में हुआ था राजगोपालाचारी का घर का नाम राजाजी था उनका जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम चक्रवर्ती वेंकट आर्यन और माता का नाम सिंगारम्मा था।

सी राजगोपालाचारी बचपन से ही शारीरिक रूप से बेहद कमजोर थे और उनके माता-पिता को ऐसा महसूस होता था कि शायद सी राजगोपालाचारी ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाएंगे।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा थोरापल्ली में हुई उसके बाद वे होसुर आर्मी गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लिया और 1891 में मैट्रिकुलेशन की परीक्षा कि इसके बाद सन 18 94 में बेंगलुरु के सेंटर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की तथा उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया और सन 1897 में पढ़ाई को पूरी किया।

वकालत की शिक्षा पूरी करने के बाद राजगोपालाचारी ने वकालत प्रारंभ की , इसी बीच सी राजगोपालाचारी की मुलाकात उस दौर के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी देशभक्त बाल गंगाधर तिलक से हुई और सी राजगोपालाचारी बाल गंगाधर तिलक से प्रभावित होकर राजनीति में प्रवेश कर गए और नगरपालिका के सदस्य उसके बाद फिर नगर पालिका के अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

सी राजगोपालाचारी धीरे धीरे आंदोलनों में हिस्सा लेने लगे और 1906 और 1907 के कांग्रेस के अधिवेशन में हिस्सा लिया।

सन 1917 की बात है जब राष्ट्रवादी एवं स्वाधीनता कार्यकर्ता पी वरदाराजुलू पर विद्रोह का मुकदमा चला था तब राजगोपालाचारी ने न्यायालय में स्वाधीनता कार्यकर्ता पी वरदा राजूलु नायडू के पक्ष में तगड़ी दलील दी थी ।

राजगोपालाचारी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से थे तथा वे गांधी जी के काफी करीबी थे जब गांधी जी ने दांडी मार्च निकाला था तब उन्होंने भी नमक कानून को तोड़ा था ।

राजगोपालाचारी जी शुरू से ही भारत की जात-पात के खिलाफ थे उस दौर में जब जातिवाद अपने चरम पर था दलितों को मंदिरों में प्रवेश पर रोक थी तब राजगोपालाचारी जी ने इसका जमकर विरोध किया जिसके फलस्वरूप दलितों को मंदिरों में प्रवेश मिलने लगी।

किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए सन 1938 में राजगोपालाचारी जी ने एग्रीकल्चर डेट रिलीफ एक्ट कानून बनाया जिससे किसानों को कर्ज से राहत मिली।



अंतिम गवर्नर माउंटबेटन के बाद राजगोपाल चारी भारत के पहले गवर्नर बने, इन्हें कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

सन 1950 में जब जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में सरकार बनी तो सी राजगोपालाचारी को गृह मंत्री बनाया गया।

सन 1952 में राजगोपालाचारी मद्रास के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए बाद में नेहरू जी से वैचारिक मतभेद के कारण यह कांग्रेस से अलग हो गए और एंटी कांग्रेस स्वतंत्र पार्टी का गठन किया।

राजगोपालाचारी एक बेहतरीन लेखक थे उन्हें तमिल और अंग्रेजी बहुत अच्छे से आती थी, इन्होंने संस्कृत ग्रंथ रामायण का तमिल में अनुवाद किया और अपने कारावास के समय के बारे में उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम था मेडिटेशन इन जेल

इनकी पार्टी 1962 के लोकसभा चुनाव में 18 और 1967 के लोकसभा चुनाव में 45 सीट हासिल की तथा तमिलनाडु और कई राज्यों में प्रभावशाली रही।

उनके पुत्र चक्रवर्ती राजगोपालाचारी नरसिम्हन कृष्णागिरी 1952 से 1962 तक लोकसभा सदस्य रहे तथा बाद में उन्होंने अपने पिता की आत्मकथा भी लिखी।

सन 1972 में सी राजगोपालाचारी का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और उन्हें मद्रास गवर्नमेंट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान 25 दिसंबर 1972 को वह सदा के लिए इस संसार को छोड़कर चले गए।