देश की आजादी के बाद आज ही के दिन 30 जनवरी 1948 को अहिंसा के पुजारी मोहनदास करमचंद गांधी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी. नाथूराम गोडसे एक हिंदू क्रांतिकारी थे जिन्हें महात्मा गांधी के हत्यारे के रूप में जाना जाता है उन्होंने 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की छाती पर 3 गोलियां मारी थी.

विनायक चतुर्वेदी के अनुसार नाथूराम गोडसे ने 1940 में RSS को छोड़ दिया था लेकिन उसके बाद भी वह RSS के लिए काम करते थे महात्मा गांधी की हत्या में नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे भी सहयोगी माने जाते हैं.
महात्मा गांधी को गोली मारने के बाद नाथूराम गोडसे वहां से भाग्य नहीं बल्कि आत्मसमर्पण कर दिया.
अदालत में सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे ने जज महोदय से आज्ञा मांगी कि वह कुछ कहना चाहते हैं.
जज महोदय ने नाथूराम गोडसे को आज्ञा दिया
नाथूराम गोडसे ने अपने बयान में कहा कि सम्मान, कर्तव्य एवं अपने समस्त देशवासियों के प्रति प्यार हमें अहिंसा के सिद्धांतों से हटने के लिए बाध्य करता है. उन्होंने कहा कि मैं कभी नहीं मान सकता कि किसी का शस्त्रों के साथ प्रतिरोध करना गलत है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर शत्रु को बलपूर्वक वश में करना एक नैतिक कर्तव्य है मुसलमान देश में अपनी मनमानी कर रहे थे या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसमर्पण कर दे और उनकी सनक मनमानी और आदित्य के स्वर में स्वर मिलाएं या फिर उनके बिना ही अपना कार्य करें.
उन्होंने कहा कि मैं अकेले ही यह निर्णय लिया था, उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण भारत माता के टुकड़े हो गए 15 अगस्त 1947 के दिन हमारे देश का एक तिहाई भाग हमारे लिए विदेशी भूमि बन गई.
कांग्रेस ने धन के आधार पर अलग अलग राज्य बना दिया और इसी को वह स्वतंत्रता कहते हैं जिसे बलिदानों के द्वारा लिखी गई है ?
नाथूराम गोडसे ने अदालत में कहा कि जब कांग्रेस के बड़े नेताओं ने महात्मा गांधी के सहमती से इस देश को बांट दिया जिस देश को हम पूजा की वस्तु मानते थे इससे मुझे क्रोध आ गया मैं साहसपूर्वक कहता हूं कि महात्मा गांधी ने अपने कर्तव्य निभाने में असफल रहे और उन्होंने खुद को पाकिस्तान परस्त होना सिद्ध किया.
नाथूराम गोडसे ने न्यायालय में कहा कि मैंने गोली एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई जिसकी नीतियों और गलत कार्यों से करोड़ों हिंदुओं को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला. हमारे पास ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया या नियम नहीं थी जिसके द्वारा उस अपराधी को सजा दे सके इसलिए मैंने महात्मा गांधी को मार दिया.
आगे नाथूराम गोडसे ने न्यायालय से कहा कि मैं अपने लिए माफी नहीं मांगूंगा, ना ही गुजारिश करूंगा.
उन्होंने कहा मुझे गर्व है कि मैंने गांधी को मार दिया लेकिन इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है कि इतिहास के इमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोल कर भविष्य में किसी रोज मेरे इस सही कार्य का मूल्यांकन करेंगे.