महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर क्षेत्र में हुआ था उनके पिता एक बैरिस्टर थे जिनका नाम करमचंद गांधी था, गांधीजी के जीवन में उनकी माता का प्रभाव बहुत ज्यादा था.
13 वर्ष की उम्र में गांधीजी का विवाह कस्तूरबा से हो गया जो समय गांधीजी से 1 साल बड़ी थी.
गांधी जी ने 1887 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और 1888 में उन्होंने भावनगर के श्यामलदास कॉलेज में दाखिला लिया यहां से डिग्री प्राप्त करने के बाद महात्मा गांधी लंदन चले गए और वहां से बैरिस्टर बनकर अपने देश वापस आए.
सन 1894 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका गए थे और वहां पर होने वाले अन्याय के खिलाफ अवज्ञा आंदोलन चलाया तथा इस आंदोलन के पूर्ण होने के बाद वह स्वदेश लौटे.

सन 1916 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और देश की आजादी के लिए उठापटक शुरू कर दी, सन 1920 में कांग्रेस एक के एक बड़े लीडर बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु हो गई उसके बाद महात्मा गांधी कांग्रेस के मार्गदर्शक बने.





 प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान गांधी जी ने अंग्रेजों का सहयोग दिया था लेकिन उन्होंने अंग्रेजों से यह शर्त रखी थी कि अगर भारतीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों का साथ देंगे तो इस युद्ध के बाद अंग्रेज भारत को आजाद कर देंगे लेकिन हुआ इसके विपरीत प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों ने देश को आज याद नहीं किया.
लेकिन देश को आजादी दिलाने के लिए गांधीजी ने ओन्ली को आंदोलन किया इसमें 1920 में असहयोग आंदोलन 1930 में अवज्ञा आंदोलन तथा 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन प्रमुख था.
महात्मा गांधी का पूरा जीवन एक आंदोलन की तरह ही रहा उनके चलाए गए आंदोलन नितिन ऐसे आंदोलन थे जो पूरे देश में चलाए गए और सफल भी हुए.

सन 1940 में देश के युवा बच्चे और बूढ़े सभी को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा था और इसी का परिणाम था 1942 का अंग्रेजो के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन या आंदोलन सबसे प्रभावी आंदोलन था इस आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत की जड़े तक हिला हिला दी.
और अंग्रेजो को इस बात का एहसास हो गया कि अब भारत में राज्य करना काफी मुश्किल है.

आंदोलन के अलावा गांधीजी ने सामाजिक बदलाव भी लाए इसमें छुआछूत को दूर करना प्रमुख था, उस समय में भी महात्मा गांधी पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए प्रयास करते रहे.
30 जनवरी 1948 को सुबह-सुबह नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारकर हत्या कर दी नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को क्यों गोली मारी थी तथा महात्मा गांधी के अंतिम समय मैं उनके मुंह से जो अंतिम शब्द निकले वह थे हे राम