कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल सन 1870 में गुजरात के पोरबंदर के काठियावाड़ में हुआ था उनके पिता का नाम गोकुलदास मकान जी था जो एक साधारण व्यापारी थे.
उस दौर में लोग अपनी बेटियों को ज्यादा पढ़ाते नहीं थे और कम उम्र में ही उनका विवाह कर देते थेकस्तूरबा के साथ भी ऐसा ही हुआ 14 वर्ष की आयु में सामाजिक परंपराओं के अनुसार कस्तूरबा की शादी मोहनदास करमचंद गांधी से कर दिया गया.




एक बार जब मोहनदास करमचंद गांधी जी से उनके शादी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि हम उस समय विवाह के बारे में कुछ जानते नहीं थे हमें उस समय विवाह का मतलब केवल नए कपड़े पहनना मीठे पकवान खाना और रिश्तेदारों के साथ खेलना था.
कस्तूरबा और महात्मा गांधी के पिता दोनों एक अच्छे और करीबी दोस्त थे इसलिए उन्होंने अपनी दोस्ती को रिश्ते दारी में बदलने पर जोर दिया कहा तो यह भी जाता है कि कस्तूरबा की सगाई मात्र 7 साल की अवस्था में 6 वर्ष के मोहनदास करमचंद गांधी से कर दी गई थी.
कस्तूरबा पढ़ी-लिखी नहीं थी इसलिए मोहनदास करमचंद गांधी उनकी निरक्षरता से खुश नहीं रहते थे उन्हें ताने देते थे.
कस्तूरबा का गृहस्थ जीवन काफी कठिन था मोहनदास करमचंद गांधी को कस्तूरबा का घर से बाहर निकलना और उनका सजना सवरना बिल्कुल पसंद नहीं था तथा उन्होंने कस्तूरबा पर अंकुश लगाने के अनेक तो प्रयत्न किए परंतु असफल रहे.
सन 1888 में जब महात्मा गांधी लंदन से वापस आए तब वह कस्तूरबा के साथ रहने लगे तथा कस्तूरबा ने पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम हरिलाल गांधी था.महात्मा गांधी और कस्तूरबा के 3 बच्चे हुए जिनका नाम मणिलाल गांधी रामदास गांधी और देवदास गांधी था.
कस्तूरबा महात्मा गांधी के साथ रहकर उनका अनुसरण करने लगी और अपने पति के साथ काम करते हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी बन गई.
सन 1913 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय क्रांतिकारक का साथ दिया इसके बाद कस्तूरबा को 3 महीने के लिए मजदूरों की जेल में जाना पड़ा.
इसके बाद जब कभी भी महात्मा गांधी जेल जाते थे तब कस्तूरबा महात्मा गांधी के अभियान और आंदोलनों को संचालित करने का काम करती थी.
चंपारण सत्याग्रह के दौरान कस्तूरबा गांधी जी के साथ ही थी और उन्होंने वहां पर लोगों को सफाई पढ़ाई तथा अनुशासन के महत्व के बारे में बताया इतना ही नहीं उन्होंने गांव में घूमकर दवाओं का वितरण भी करती रही तथा खेड़ा सत्याग्रह के दौरान कस्तूरबा गांधी जगह-जगह घूम घूम कर महिलाओं का उत्साहवर्धन करती थी.

जब महात्मा गांधी को गिरफ्तार किया गया था उसके बाद कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी के तारी के विरोध में विदेशी कपड़ों का परित्याग करने का आवाहन किया और वक्तव्य दिया.
कस्तूरबा गांधी गांव-गांव घूमकर महात्मा गांधी के संदेश को गुजरात के हर गांव में पहुंचाया।जब सन 1920 में दांडी और धरासड़ा के बाद महात्मा गांधी को जेल हुई तब महात्मा गांधी की जगह लेकर कस्तूरबा में लोगों का मनोबल बढ़ाया।
जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने महात्मा गांधी के साथ और कांग्रेस के बड़े नेताओं को 9 अगस्त 1942 को गिरफ्तार किया था इसके बाद से कस्तूरबा गांधी ने मुंबई के शिवाजी पार्क में भाषण देने का निश्चय किया लेकिन उनके वहां पहुंचने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें पुणे के आगा खां महल में भेज दिया गया जहां पर पहले से ही महात्मा गांधी को रखा गया था।
कस्तूरबा की गिरफ्तारी के बाद उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट आई कस्तूरबा में निमोनिया की बीमारी से पीड़ित थी जनवरी 1940 में उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ा इलाज के बाद उन्हें कुछ आराम मिला फिर 22 फरवरी 1944 को दिल का दौरा पड़ने के कारण कस्तूरबा का देहांत हो गया और इस दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए चली गई।