आज 21वीं  शताब्दी में भी देश की अधिकतर भागों में बिजली की उपलब्धता ना होने के कारण या रात में बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति ना होने के कारण गांव के गांव अंधेरे में डूबे रहते हैं इसलिए मोमबत्ती गांव और शहरों में अत्यंत जरूरी चीज है.  गांव और शहरों में रात में बिजली आपूर्ति ना होने के कारण दीया बत्ती और घासलेट जिसे मिट्टी के तेल के नाम से जाना जाता है की मांग ज्यादा रहती है कि इस की उपलब्धता बहुत ही कम है इसीलिए मोमबत्ती दैनिक जीवन का एक जरूरी हिस्सा हो गया है.
धार्मिक कार्यों त्योहारों,  बच्चों के जन्मदिन, श्रद्धांजलि देने के लिए तथा कैंडल लाइट डिनर के लिए मोमबत्ती का उपयोग भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्राचीन काल से होता आ रहा है.  बिजली जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में एक हिस्सा है जो मोमबत्ती पर ही निर्भर होता है इसलिए मोमबत्ती की मांग हमेशा बाजार में रहती है.


मोमबत्ती उद्योग शुरू करना बहुत ही आसान है एक-दो दिन की ट्रेनिंग ले कर भी आप इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं मोमबत्ती व्यवसाय में स्पर्धा ज्यादा है लेकिन उसके अनुसार मार्केट में ग्राहक भी उपलब्ध है.
मोमबत्ती को तैयार करने के लिए अधिकतर चाइना का उपयोग किया जाता है कच्चे हमको बड़े बर्तन में लेकर गैस पर रखकर पिघलाया जाता है उसके बाद इसे सांचे में डालकर जरूरत के हिसाब से पिघला हुआ मोम डालते हैं और नया मोम तैयार करते हैं  सांचा ठंडा होने के बाद में बाहर निकालते हैं उसके ऊपर जिलेटिन कागज चिपकाए जाती है. बाजार में आवश्यकता के अनुसार 2 ,5 और ₹10 की मोमबत्तियां तैयार की जाती है.




मार्केट



मोमबत्ती हर घर की जरूरत है हर फरमाइश के ग्राहक उपलब्ध है इसे रिटर्न होलसेल व्यापारियों,  किराने की दुकानों, सुपर मार्केट, आदि जगहों पर आसानी से बेच सकते हैं.


रा मटेरियल


इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए आराम मटेरियल्स के रूप में चाइना मोम,  इराक मोम, इरान मोम, कोरियन मोम, इंडोनेशिया मोम, ऐसे अनेकों प्रकार के मुंह होलसेल व्यापारियों के पास मिलते हैं.
एल्युमीनियम के अनेकों प्रकार के सांचे,  में घर जरूरत के हिसाब से बड़ा बर्तन, धागे,  नारी, पिघलाने के लिए गैस तथा सेंटर मोमबत्तियों के लिए सुगंधित द्रव्य,  जिलेटिन पेपर, तथा डाई को ठंडी करने के लिए पानी और पानी का पंप, तथा PVC सलूशन आदि कच्चे माल के रूप में लगते हैं.


इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 300 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 200 स्क्वायर फीट की इमारत होनी चाहिए अगर मुंसिपल की बात करें तो सिर्फ दो लोग ही इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं यंत्र सामग्री पर कुल ₹50000 तक का खर्च आता है अगर कच्चे माल की बात करें तो मासिक ₹30000 का कच्चा माल इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए लगता है
जिसके अनुसार वार्षिक करीब ₹300000 का कच्चा माल लगेगा जिससे कि ₹520000 तक की मोमबत्तियों को तैयार किया जा सकता है इस व्यवसाय में कुल वार्षिक खर्च करीब ₹400000 पक्का होता है जिसमें मनुष्य बल का वेतन और अन्य खर्च भी है.


इस प्रकार इस व्यवसाय से आसानी से  कम लागत में एक छोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं जिससे वार्षिक एक लाख ₹20000 तक की कमाई हो सकती है.