वर्तमान समय में आधुनिकीकरण के कारण अनेकों प्रकार के मांगलिक कार्यों में महिलाएं आकर्षक दिखने के लिए नकली
गानों का उपयोग करती है इन्हें इमिटेशन ज्वेलरी या आर्टिफिशियल ज्वेलरी कहते हैं अधिकतर महिलाएं आकर्षक दिखने
के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी को खरीद लेती है सोने के गहने  खरीदने में जो लोग असमर्थ होते हैं वह भी इसका उपयोग
करते हैं क्योंकि सोने की कीमत आज आसमान छूने को आतुर है.
महिलाएं पुराने समय से ही सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करती आ रही है तथा उन्हें हर प्रकार के गहनों का शौक है.


सोने चांदी के गहने खरीद लेना संभव  ना होने से इमिटेशन ज्वेलरी या आर्टिफिशियल ज्वेलरी शादी समारोह,  त्यौहारों में
उपयोग करना वर्तमान समय में एक फैशन बन गया है.


आर्टिफिशियल ज्वेलरी से मतलब महिलाओं के हार,  कंगन, कान के झुमके, अंगूठी , पायल, ब्रेसलेट, कुंदन और
नेकलेस से है.


आर्टिफिशियल गहने में सोने और चांदी की चमक और आकर्षक  जिद्दी डिज़ाइनों के इसकी मां बहुत ही ज्यादा है इसलिए
आजकल महिलाएं सजने-संवरने के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी का उपयोग करती है.


आर्टिफिशियल ज्वेलरी की खास बात यह है कि इसका कच्चा माल काफी सस्ता मिल जाता है.  इसलिए इसकी मांग
ज्यादा ही रहती है. इस उद्योग को घर बैठे ही भी कर सकते हैं या फिर पार्ट टाइम के रुप में भी इस व्यवसाय को शुरू कर
सकते हैं. यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें नुकसान होने की संभावना नहीं होती है.




मार्केट


सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानें, प्रदर्शनी,  ब्यूटी पार्लर तथा आदित्य स्टेशनरी की दुकानों पर आर्टिफिशियल ज्वेलरी की मांग
बहुत है.


रा मटेरियल

अनेकों प्रकार के कुंदन, मनी,   संखलियो की कड़ियां, चमकने वाले हीरे, नकली मोती, धागे तथा अनेको प्रकार की  
संखलियोकी डिजाइनें आदि कच्चे माल के रूप में लगते हैं.


मशीनरी

हैंडमोल्डिंग मशीन, चिमटे, मनी,  पिरोने की तार, सुई, छोटे पकड़, छोटी हथौड़ी, फेविकोल आदि जरूरत के हिसाब से
लगते हैं.

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 400 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 200 स्क्वायर फीट की इमारत
होनी चाहिए इस व्यवसाय को दो मनुष्य बल के साथ आसानी से किया जा सकता है इसमें एक क्वेश्चन और एक अकुशल
मनुष्य बल की जरूरत होती है.
अगर यंत्र सामग्री की बात करें तो यंत्र सामग्री पर कुल ₹45000 का खर्च आता है तथा कच्चा माल मासिक ₹30000 तक
का लगता है अगर हम ₹30000 कच्चे माल से इस व्यवसाय को शुरू करते हैं तो वार्षिक 360000 रुपए का कच्चा माल
लगेगा जिस से बनी सामग्री की बिक्री ₹940000 में होगी कुल वार्षिक खर्चा ₹650000 का होगा.  इस प्रकार इस व्यवसाय
से आसानी से दो लाख 90 हजार रुपए वार्षिक फायदा होगा.