वैसे तो हमारे देश में प्राचीन काल से ही पलसो के पत्तों से पत्रावली और द्रोण तयार करने का व्यवसाय था लेकिन आधुनिकीकरण के साथ पेपर डिश ने इसकी जगह ले ली तथा पेड़ों के पत्तों से तैयार किए जाने वाले पत्रावली का व्यवसाय कम हो गया इसे भारतीय संस्कृति में सालों से खानपान के लिए उपयोग किया जाता था.
आज भी बड़े-बड़े धार्मिक कार्यक्रमों में शादी विवाह चुनाव तथा धार्मिक विधियों में इनका उपयोग किया जाता है.
पेपर डिश तथा द्रोण पत्रावली व्यवसाय आजकल काफी तेजी से चल रहा है.
वर्तमान समय में रोड़ा पत्रावली तथा पेपर डिश का उपयोग अधिक मात्रा में हो रहा है तथा इस व्यवसाय में काफी तेजी आई है.
द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका उपयोग करने के बाद इसे फेंक दी जाती है इसे धोने की जरूरत नहीं होती.

मशीनरी

द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश उद्योग के लिए मुख्य रूप से हाइड्रोलिक मशीन की जरूरत होती है जिससे 1 दिन में कम से कम 10000 पत्रावली तैयार की जा सकती है.

रॉ मटेरियल

अनेकों प्रकार के वाटरप्रूफ कागज तथा जिन आकार में द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश तैयार करना है उस आकार की डाई और मांग के अनुसार गोल्डन और सिल्वर प्लास्टिक कोटेड पेपर की जरूरत होती है.

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 300 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होती है तथा इस मशीन को चलाने के लिए एक कुशल और अकुशल मनुष्य बल की जरूरत होती है अगर यंत्र सामग्री की बात करें तो यह मशीन ₹45000 में आ जाता है जिसका कच्चा माल वार्षिक ₹500000 का होता है
इस व्यवसाय में भी 35% खुद खर्च करना होता है तथा 65% बैंक से कर्ज मिलता है इस व्यवसाय में कुल वार्षिक बिक्री 1127000 की होती है तथा कुल वार्षिक खर्च 7 लाख 48 हजार रुपए का होता है.
 तथा कुल वार्षिक फायदा 3 लाख  79 हजार रुपए का होता है.