आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान भौतिक सुख के पीछे लिखे हुए जमाने में अधिकतर लोग नौकरी को प्रधानता देते हैं लेकिन हम व्यवसाय करें या नौकरी इसके बारे में हमारे मन में जो संकल्प है उस संकल्प कि एक बार ही सही लेकिन जांच करनी चाहिए.
नौकरी में सामान्यतः 8 घंटे का काम होता है और प्रति महीना एक दीक्षित वेतन मिलता है इसमें नफे नुकसान की जिम्मेदारी नहीं रहती है. इसमें हमें कंपनी के नकली नुकसान से कुछ भी लेना देना नहीं होता है 8 घंटे ड्यूटी करने पर अपना काम पूरा हो जाता है जिससे कि महीने में एक निश्चित वेतन मिलता है और उस मिलने वाले वेतन से पारिवारिक खर्च पूरा होता है.
शायद इसीलिए आजकल की युवा व्यवसाय से ज्यादा नौकरी को प्रधानता दे रहे हैं हर कोई सोचता है कि जब नौकरी से हमारा जीवन अच्छी तरह चल रहा है तो फिर उद्योग व्यवसाय में जाकर धोखा क्यों खाएं यही भावना आजकल के युवाओं में है.


बच्ची से पढ़ाई करते हैं तो अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही सिखाते हैं कि उनसे पूछते हैं कि उन्हें बड़ा होकर क्या बनना है कौन सी नौकरी करनी है यही सोच समझकर अभिभावक अपने बच्चे को शिक्षा भी देते हैं उस क्षेत्र से संबंधित.
अधिकतर अभिभावक अपने इच्छाओं आकांक्षाओं को अपने बच्चों पर लगते हैं वह यह जानने की कोशिश नहीं करते कि उनकी रुचि क्या है उनकी क्षमता क्या है वह क्या करना चाहते हैं उन्हें क्या करना संभव है ?
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सबको अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी चाहिए होती है लेकिन इसमें कुछ ही लोग होते हैं जो जिस क्षेत्र की शिक्षा ले उसी क्षेत्र में प्रगति विकास करने की दृष्टि से नया कुछ तो करने के लक्ष्य से उस क्षेत्र में अनुसंधान अध्ययन कर के नए प्रयोग करना चाहते हैं और इस बात के लिए अभिभावकों का संभवता विरोध रहता है नौकरी को आज सामाजिक प्रतिष्ठा मिल चुकी है.
भावुक अपने बच्चों को यह उदाहरण देते हैं कि उनका बच्चा यह नौकरी करता है इतना वेतन पाता है.
लेकिन ऐसे उदाहरण देते वक्त हम धीरूभाई अंबानी किर्लोस्कर बजाज रतन टाटा बिरला लक्ष्मी निवास मित्तल जैसे उद्योगपतियों ने किस तरह उन्नति की उनके उदाहरण देना भूल जाते हैं उन्होंने कैसे खुद के विकास के साथ-साथ देश के विकास में अतुलनीय योगदान दिया उसे भी आजकल के युवाओं के सामने रखे जाने चाहिए जो कि सामान्य तौर पर रखा नहीं जाता.
हमें नौकरी या व्यवसाय में प्रवेश करने से पहले हमें इसका दृढ़ संकल्प करना चाहिए कि हम नौकरी करें या फिर व्यवसाय.
नौकरी करें या व्यवसाय इसका फैसला करें और फैसला होते ही तैयारी में लग जाए क्योंकि फैसला ना करना भी असफलता की एक निशानी है अपने आलस्य त्याग दें अपने समय का सदुपयोग करें अपने काम में लगे.
यदि आपने यह निर्णय लिया कि आपको व्यवसाय करना है तो कौन सा व्यवसाय करें इस का चयन करें क्योंकि जो व्यवसाय करेंगे उसकी सफलता और सफलता आपके करियर से संबंधित होने के कारण उसमें आपका कार्य हो जाएगा और आपको जो संभव है ऐसा व्यवसाय का चयन करें.